बाबू दरबारीलाल जी ने डी ऐ वी आन्दोलन और आर्य समाज के क्षेत्र में ४७ वर्षो तक उल्लेखनीय कार्य किए है और ऐसा वह इस लिए कर पाए क्योकि उनकी आत्मा में पूर्वजन्मो के दिव्य संस्कार थे या यूं कहा जा सकता है कि वें जो इतने विलक्ष्ण कार्य कर पाए वे उनकी दिव्यता से ही सम्भव हो पाए ।
दिव्य लोगो का अवतरण महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए ही समय समय इस धरा पर होता है .ऐसे दिव्य पुरूष का स्मरण करना स्वयम भी दिव्य कर्म करने की एक प्रक्रिया है और स्वयम शुभ कर्मो की वृद्धि का आधार है

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